नहीं होता सजदा न हमसे सलाम यारों
सियासत का झूठ बोलना काम यारों
जाने कैसे पूरा देश बेच देते हैं चंद लोग
अपने लिये पराया ज़र्रा भी हराम यारों
इस क़दर नंगे देखे हैं इन आँखों ने लोग
अब हमसे तो नहीं होती राम राम यारों
कहाँ क़दर है यहाँ अच्छे लोगों की
चमचे पाते है यहाँ ईनाम यारों
कया ज़रूरते गुफ़्तगू हैं इन कमज़रफों से
जो कहना होगा कह देंगे मेरे कलाम यारों
हम तो चले आये यह ज़ंजीरें तोड़कर
जाओ ढूँढो कोई और ग़ुलाम यारों
नरेश मधुकर©
सियासत का झूठ बोलना काम यारों
जाने कैसे पूरा देश बेच देते हैं चंद लोग
अपने लिये पराया ज़र्रा भी हराम यारों
इस क़दर नंगे देखे हैं इन आँखों ने लोग
अब हमसे तो नहीं होती राम राम यारों
कहाँ क़दर है यहाँ अच्छे लोगों की
चमचे पाते है यहाँ ईनाम यारों
कया ज़रूरते गुफ़्तगू हैं इन कमज़रफों से
जो कहना होगा कह देंगे मेरे कलाम यारों
हम तो चले आये यह ज़ंजीरें तोड़कर
जाओ ढूँढो कोई और ग़ुलाम यारों
नरेश मधुकर©
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