दो पल मिले थे प्यार के हंस कर गुज़ार दिए
इन दो पलों ने लेकिन सपने हज़ार दिए
सूरज डूब गया तो साया भी चला गया
बुरे वक्त ने मधुकर कई चश्में उतार दिए
संभल सका न हमसे ख़ुद अपना ही नशा
सूरज डूब गया तो साया भी चला गया
बुरे वक्त ने मधुकर कई चश्में उतार दिए
संभल सका न हमसे ख़ुद अपना ही नशा
उस पर यारों ने हमको अपने ख़ुमार दिए
यक़ीन न हो तो पूछो जलती शमां से तुम
सजी महफ़िलों ने अक्सर सूने दयार दिए
यक़ीन न हो तो पूछो जलती शमां से तुम
सजी महफ़िलों ने अक्सर सूने दयार दिए
किस किस से करते हम वफाओं का हिसाब
जिसने जो गम देने थे वो सरे बाज़ार दिए
नरेश मधुकर
©2014
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