लम्हां लम्हां हादसों की किताब ज़िंदगी
कौन रखता हैं मधुकर मोहब्बत में हिसाब
शिद्दत से हमने जी ली बेहिसाब ज़िंदगी
जब से जा बैठे हम तेरी सोहबत में सनम
लगने लगी थी हमको लाजवाब ज़िंदगी
ले गयी लहरें साथ में मिटटी के महल सभी
कतरा कतरा पानी पे लिखा ख्वाब ज़िंदगी
गुमसुम जा बैठे छोडकर तिरी महफ़िल का दयार
किस किस को आखिर देती जवाब ज़िंदगी
नरेश मधुकर © 2014

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