रौशनी से बचकर चलो साए न मिलेंगे
तंग गलियों में अक्सर लोग पराये न मिलेंगे
झूठ में तुम ज़माने के अगर घुल जाओगे
लोग हाथों में पत्थर उठाये न मिलेंगे
बीता अरसा शहर का नक्श बदल गया
रास्ते जिन पे चले हमतुम बताये न मिलेंगे
दौरे वीरानगी का अब तो ये हाल हैं मधुकर
वो नयन जिसमे कभी ख्वाब समाये न मिलेंगे
मेरी मैयत में जो तुम आ सको तो ज़रूर आना
होंगे दुश्मन सभी मेरे दोस्त चाहे न मिलेंगे ...
नरेश मधुकर
© 2014
तंग गलियों में अक्सर लोग पराये न मिलेंगे
झूठ में तुम ज़माने के अगर घुल जाओगे
लोग हाथों में पत्थर उठाये न मिलेंगे
बीता अरसा शहर का नक्श बदल गया
रास्ते जिन पे चले हमतुम बताये न मिलेंगे
दौरे वीरानगी का अब तो ये हाल हैं मधुकर
वो नयन जिसमे कभी ख्वाब समाये न मिलेंगे
मेरी मैयत में जो तुम आ सको तो ज़रूर आना
होंगे दुश्मन सभी मेरे दोस्त चाहे न मिलेंगे ...
नरेश मधुकर
© 2014
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