जब ख्वाईश ख़्वाबों के सांचे में ढल जाती है
खुशनुमा ज़िंदगी अक्सर बदल जाती है
दौड़ मोहब्बत की जीत पाना मुश्किल हैं
हकीकत हसरत से आगे निकल जाती है
ये दिलवालों का शहर है दिमाग्वालों हैरान मत हो
यहाँ सिक्के नहीं प्यार की कौड़ियाँ भी चल जाती हैं
नहीं मुमकिन यह तपिश थामे रखना अय दोस्त
ऐसी कोशिशों में उंगलियाँ जल जाती हैं
न देखो मुड़कर मेरी परवाह न करो मधुकर
वफाएं मेरी अक्सर खता खाकर संभल जाती है
नरेश मधुकर
© 2013
खुशनुमा ज़िंदगी अक्सर बदल जाती है
दौड़ मोहब्बत की जीत पाना मुश्किल हैं
हकीकत हसरत से आगे निकल जाती है
ये दिलवालों का शहर है दिमाग्वालों हैरान मत हो
यहाँ सिक्के नहीं प्यार की कौड़ियाँ भी चल जाती हैं
नहीं मुमकिन यह तपिश थामे रखना अय दोस्त
ऐसी कोशिशों में उंगलियाँ जल जाती हैं
न देखो मुड़कर मेरी परवाह न करो मधुकर
वफाएं मेरी अक्सर खता खाकर संभल जाती है
नरेश मधुकर
© 2013
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