हैसियतों और हसरतों से दूर हैं
मधुकर अपने ही नशे में चूर हैं
नहीं परेशान मैं तेरे नज्दीकों से
बस तुझ से दूरी ना मंज़ूर हैं
नशा अब कहाँ सवार होता हैं मुझपे
बस तेरे हुस्न का सुरूर हैं
हर शख्स की अपनी मोहब्बत 'मधुकर'
हर आशिक का अपना गुरूर हैं ...
नरेश मधुकर
मधुकर अपने ही नशे में चूर हैं
नहीं परेशान मैं तेरे नज्दीकों से
बस तुझ से दूरी ना मंज़ूर हैं
नशा अब कहाँ सवार होता हैं मुझपे
बस तेरे हुस्न का सुरूर हैं
हर शख्स की अपनी मोहब्बत 'मधुकर'
हर आशिक का अपना गुरूर हैं ...
नरेश मधुकर
No comments:
Post a Comment